मै मर भी सकता हूँ मै मिट भी सकता हूँ !
मगर डरता हूँ सिर्फ दो पल की ज़िंदगी के लिए !
मुझे मारने का ख्याल लाना ना एक पल भी ,
मै तो ज़िंदा हूँ सिर्फ दो पल की ज़िंदगी के लिए !
घुटन भरी हवाएं फिजाओं में चल रहीं फिर भी ,
सांस ले रहा हूँ सिर्फ दो पल की ज़िंदगी के लिए !
तमाम उम्र का ये बोझ दुश्मनों को मुबारक हो ,
मुझे तो छोड़ दो सिर्फ दो पल की ज़िंदगी के लिए !
ज़िंदगी भी मातम मनाती है उनके मौतों पर,
जो जी रहे थे अबतक दो पल की ज़िंदगी के लिए !
कभी तुम मत आजमाना मेरी ज़िंदगी से मुहब्बत को!
एक पल में ही मिट जाउंगा इस दो पल की ज़िंदगी के लिए !
या खुदा या मालिक अब तो रहम कर दे ,
एक पल ही दे दे ना इस दो पल की ज़िंदगी के लिए !
वाह...बहुत बढ़िया.
जवाब देंहटाएंपंकज झा.
बहुत बहुत धन्यवाद पंकज जी
जवाब देंहटाएंइन दो पलों की तड़प तड़पा गई. जारी रहें.
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सपरिवार आपको नव वर्ष की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनाएं.
नव वर्ष २०११ और एक प्रार्थना