गुरुवार, 30 दिसंबर 2010

दो पल की ज़िंदगी के लिए.......

मै मर भी सकता हूँ मै मिट भी सकता हूँ !
मगर डरता हूँ सिर्फ दो पल की ज़िंदगी के लिए !


मुझे मारने का ख्याल लाना ना एक पल भी ,

मै तो ज़िंदा हूँ सिर्फ दो पल की ज़िंदगी के लिए !

घुटन भरी हवाएं फिजाओं में चल रहीं फिर भी ,

सांस ले रहा हूँ सिर्फ दो पल की ज़िंदगी के लिए !

तमाम उम्र का ये बोझ दुश्मनों को मुबारक हो ,

मुझे तो छोड़ दो सिर्फ दो पल की ज़िंदगी के लिए !

ज़िंदगी भी मातम
मनाती है उनके मौतों पर,
जो जी रहे थे अबतक दो पल की ज़िंदगी के लिए !

कभी तुम मत आजमाना मेरी ज़िंदगी से मुहब्बत को!

एक पल में ही मिट जाउंगा इस दो पल की ज़िंदगी के लिए !

या खुदा या मालिक अब तो रहम कर दे ,

एक पल ही दे दे ना इस दो पल की ज़िंदगी के लिए ! 

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