सोमवार, 10 जनवरी 2011

अबला अब तो संघर्ष करो ..............

अबला अब तो संघर्ष करो ,
कुछ आज तुम्हे करना होगा !
कुलसित
,कुत्सित मानव से अब,
खुद हेतु आज लड़ना होगा !

कब तक नारी तुम सोवोगी,

यह राष्ट्र ना सोने वालों का !
हे अचल धरा कि श्रृष्टि-दात्री,
फिर आज तुम्हे जगाना होगा !

यह देश सती सावित्री का ,

यह देश पदमा वीरांगना का है !
जो किया लक्ष्मीबाई ने ,
वो आज तुम्हे करना होगा !

मातृत्व तुम्हही में बसता है,

स्नेह तुम्ही बरसाती हो !
हे नारी खुद के हेतु तुम,
क्यों आज ना लड़ने आती हो !

संसार बड़ा पामर है ये

जो तुम्हे समझ ना पायेगा
नारी प्रताणना का ही ये
नित-नित इतिहास बनाएगा !

इतिहास बदलने कि खातिर

संकल्प आज लेना होगा
अपना अस्तित्व बचाने को
बलिदान पुन: देना होगा !

फिर धरा तुम्हारी ही होगी,

आकाश तुम्हारा ही होगा !
इस अखिल धरा पर हे देवी ,
सम्मान तुम्हारा भी होगा !

3 टिप्‍पणियां: