अबला अब तो संघर्ष करो ,
कुछ आज तुम्हे करना होगा !
कुलसित ,कुत्सित मानव से अब,
खुद हेतु आज लड़ना होगा !
कब तक नारी तुम सोवोगी,
यह राष्ट्र ना सोने वालों का !
हे अचल धरा कि श्रृष्टि-दात्री,
फिर आज तुम्हे जगाना होगा !
यह देश सती सावित्री का ,
यह देश पदमा वीरांगना का है !
जो किया लक्ष्मीबाई ने ,
वो आज तुम्हे करना होगा !
मातृत्व तुम्हही में बसता है,
स्नेह तुम्ही बरसाती हो !
हे नारी खुद के हेतु तुम,
क्यों आज ना लड़ने आती हो !
संसार बड़ा पामर है ये
जो तुम्हे समझ ना पायेगा
नारी प्रताणना का ही ये
नित-नित इतिहास बनाएगा !
इतिहास बदलने कि खातिर
संकल्प आज लेना होगा
अपना अस्तित्व बचाने को
बलिदान पुन: देना होगा !
फिर धरा तुम्हारी ही होगी,
आकाश तुम्हारा ही होगा !
इस अखिल धरा पर हे देवी ,
सम्मान तुम्हारा भी होगा !
इक़ जरूरतमंद और सार्थक रचना. बेहद उम्दा.
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सागर by AMIT K SAGAR
behad sundar rachana hai. keep it up
जवाब देंहटाएंधन्यवाद बंधु !
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